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Friday, 9 November 2018

चमत्कारी लक्ष्मी यंत्र से दूर होगी आर्थिक समस्याएं

चमत्कारी लक्ष्मी यंत्र से दूर होगी आर्थिक समस्याएं
Article courtesy: GURUTVA JYOTISH Monthly E-Magazine November-2018
लेख सौजन्यगुरुत्व ज्योतिष मासिक ई-पत्रिका (नवम्बर-2018) 

श्री यंत्र
"श्री यंत्र" सबसे महत्वपूर्ण एवं शक्तिशाली यंत्र है। श्री यंत्र की महिमा से सायद ही कोई व्यक्ति अज्ञात होगा क्योकि "श्री यंत्र" को यंत्र राज कहा जाता है क्योकि यह अत्यन्त शुभ फ़लदयी यंत्र है। श्री यंत्र धनप्राप्ति हेतु न केवल दूसरे यन्त्रो से अधिक से अधिक लाभ देने मे समर्थ है एवं संसार के हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद साबित होता है। पूर्ण प्राण-प्रतिष्ठित एवं पूर्ण चैतन्य युक्त "श्री यंत्र" जिस व्यक्ति के घर मे होता है उसके लिये "श्री यंत्र" अत्यन्त फ़लदायी सिद्ध होता है उसके दर्शन मात्र से अन-गिनत लाभ एवं सुख की प्राप्ति होति है। 
"श्री यंत्र" मे समाई अद्वितीय एवं अद्रश्य शक्ति मनुष्य की समस्त शुभ इच्छाओं को पूरा करने मे समर्थ होति है। जिस्से उसका जीवन से हताशा और निराशा दूर होकर वह मनुष्य असफ़लता से सफ़लता कि और निरन्तर गति करने लगता है एवं उसे जीवन मे समस्त भौतिक सुखो कि प्राप्ति होति है। 
"श्री यंत्र" मनुष्य जीवन में उत्पन्न होने वाली समस्या-बाधा एवं नकारात्मक उर्जा को दूर कर सकारत्मक उर्जा का निर्माण करने मे समर्थ है। "श्री यंत्र" की स्थापन से घर या व्यापार के स्थान पर स्थापित करने से वास्तु दोष य वास्तु से सम्बन्धित परेशानि मे न्युनता आति है व सुख-समृद्धि, शांति एवं ऐश्वर्य कि प्रप्ति होती है। स्फटिक का श्री यंत्र सर्वश्रेष्ठ माना जाता हैं।

लक्ष्मीकुबेर धन आकर्षण यंत्र
श्रीयंत्र को समस्त प्रकार के श्रीयंत्रों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है और कुबेर यंत्र को देवताओं में धन के देवता कुबेर जी का सबसे प्रभावशाली यंत्र माना जाता हैं इस यंत्र के पूजन से अक्षय धन कोष की प्राप्ति होती हैं और मनुष्य के लिए नवीन आय के स्रोत बनते हैं। प्रतिदिन लक्ष्मीकुबेर धन आकर्षण यंत्र का पूजन एवं दर्शन करने से व्यक्ति को जीवन में धन और ऐश्वर्य की कभी भी कमी नहीं होती है। विद्वानों ने अपने अनुभवों में पाया हैं की जो मनुष्य अपने गृहस्थ जीवन में धन, वैभव, ऐश्वर्य, सुख-समृद्धि, व्यापार में सफलता, विदेश लाभ, राजनीति में सफलता, नौकरी में पदौन्न्ति आदि की कामना रखता हैं तो उसके लिए श्री लक्ष्मीकुबेर धन आकर्षण यंत्र सर्वश्रेष यंत्र हैं। मनुष्य को लक्ष्मीकुबेर धन आकर्षण यंत्र के पूजन से जीवन के सभी क्षेत्र में सुख-समृद्धि एवं सौभाग्य की प्राप्त होने लगती है।
यदि किसी व्यक्ति को व्यापार में यदि व्यापार में पूर्ण परिश्रम एवं लगने से कार्य करने पर भी अधिक लाभ की प्राप्ति नहीं हो रही हो, व्यापार मंदा चल रहा हो या बार-बार लाभ के स्थान पर हानि हो रही हो तो उसे लक्ष्मीकुबेर धन आकर्षण यंत्र को अवश्य अपने व्यवसायीक स्थान पर स्थापित करना चाहिए। जिससे व्यापार में बार-बार होने वाले घाटे या नुकसान से शीघ्र ही लाभ प्राप्त होने के योग बनने लगते हैं। ।

गणेश लक्ष्मी यंत्र
प्राण-प्रतिष्ठित गणेश लक्ष्मी यंत्र को अपने घर-दुकान-ओफिस-फैक्टरी में पूजन स्थान, गल्ला या अलमारी में स्थापित करने व्यापार में विशेष लाभ प्राप्त होता हैं। यंत्र के प्रभाव से भाग्य में उन्नति, मान-प्रतिष्ठा एवं व्यापर में वृद्धि होती हैं एवं आर्थिक स्थिमें सुधार होता हैं। गणेश लक्ष्मी यंत्र को स्थापित करने से भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी का संयुक्त आशीर्वाद प्राप्त होता हैं। श्री गणेश लक्ष्मी यंत्र के नियमित पूजन एवं दर्शन से व्यक्ति के सकल विध्नों एवं दुःख दरिद्रताका नाश होता हैं।
जिस प्रकार भगवान गणेश के नाम स्मरण और दर्शन मात्र से व्यक्ति के सकल विघ्नों, संकट, आदि बाधाओं का स्वतः ही नाश होता हैं, उसी प्रकार देवी लक्ष्मी के स्मरण और दर्शन मात्र से व्यक्ति का दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल जाता हैं उसके समस्त दुखः दरिद्रता का स्वतः ही नाश होता हैं। गणेश लक्ष्मी यंत्र के पूजन से परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि का आगमन होने लगता हैं यहि कारण हैं गणेश लक्ष्मी यंत्र की महिमा अपरंपार हैं।

कनकधारा यंत्र
आज के भौतिक युग में हर व्यक्ति अतिशीघ्र समृद्ध बनना चाहता हैं। कनकधारा यंत्र कि पूजा अर्चना करने से व्यक्ति के जन्मों जन्म के ऋण और दरिद्रता से शीघ्र मुक्ति मिलती हैं। यंत्र के प्रभाव से व्यापार में उन्नति होती हैं, बेरोजगार को रोजगार प्राप्ति होती हैं। कनकधारा यंत्र अत्यंत दुर्लभ यंत्रो में से एक यंत्र हैं जिसे मां लक्ष्मी कि प्राप्ति हेतु अचूक प्रभावा शाली माना गया हैं।  कनकधारा यंत्र को विद्वानो ने स्वयंसिद्ध तथा सभी प्रकार के ऐश्वर्य प्रदान करने में समर्थ माना हैं।

कुबेर यंत्र
आज के दौर में हर व्यक्ति की चाहता कि उसके पास अपार धन-संपत्ति हो। उसके पार दुनिया का हर ऐशो-आराम मौजुद हो, उसे कभी किसी चीज की कमी न हो। एसे लोगो के लिये कुबेर यंत्र एक प्रकार से चमत्कारी यंत्र है कुबेर यंत्र। कुबेर यंत्र के पूजन से स्वर्ण लाभ, रत्न लाभ, पैतृक सम्पत्ती एवं गड़े हुए धन से लाभ प्राप्ति कि कामना करने वाले व्यक्ति के लिये कुबेर यंत्र अत्यन्त सफलता दायक होता हैं। एसा शास्त्रोक्त वचन हैं। कुबेर यंत्र के पूजन से एकाधिक स्त्रोत्र से धन का प्राप्त होकर धन संचय होता हैं। कुबेर यंत्र धन अधिपति धनेश कुबेर का यंत्र है, इस लिये कुबेर यंत्र के प्रभाव से यक्षराज कुबेर प्रसन्न होकर अतुल सम्पत्ति का वरदान देते हैं।
धर्म शास्त्रों में वर्णित हैं लंकाधिपति रावण ने भगवान महादेव से कुबेर यंत्र प्राप्त कर उसका विधि-विधान से पूजन किया था, यही कारण हैं की रावण नें देवाधिराज कुबेर को प्रशन्न कर लिया था जिसके कारण ही उसका राज्य पूर्ण रुप से समृद्ध और वैभवशाली था। कुबेर यंत्र के प्रताप से ही रावणने पूरी लंका सोने की बनाई थी। इस लिए धन-संपत्तिकी कामना करने वाले मनुष्य को कुबेर यंत्र का पूजन अवश्य करना चाहिए।
लक्ष्मी प्राप्ति हेतु उरोक्त यंत्र के अलावा अन्य यंत्र भी विशेष प्रभावशाली होते हैं। जिस यंत्रों का यहां समावेश नहीं किया गया हैं अतः उसकी महत्वता का कम होना या वह कम प्रभावी हैं एसा बिल्कुल नहीं हैं, केवल यहां समय के अभाव में एवं पाठको के शीघ्र मार्गदर्शन हेतु केवल अनुभूत यंत्रों का समावेश किया गया हैं।
 
 GURUTVA JYOTISH E-MAGAZINE NOVEMBER-2018
(File Size : 7.07 MB)
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Article courtesy: GURUTVA JYOTISH Monthly E-Magazine November-2018
लेख सौजन्यगुरुत्व ज्योतिष मासिक ई-पत्रिका (नवम्बर-2018) 

    

धन वर्षाने वाली सात दुर्लभ लक्ष्मी साधनाएं

धन वर्षाने वाली सात दुर्लभ लक्ष्मी साधनाएं    
Article courtesy: GURUTVA JYOTISH Monthly E-Magazine November-2018
लेख सौजन्यगुरुत्व ज्योतिष मासिक ई-पत्रिका (नवम्बर-2018) 
धन वर्षा का अर्थ यहां आसमान से धन की बारिश होना नहीं हैं। धन वर्षा का अर्थ यहां जीवन से धन अभाव को दूर करना मात्र हैं। अतः बुद्धिजीवी पाठकों से निवेदन हैं की अपनी बुद्धि विवेक से इस अर्थ के गूढ़ रहस्य को समझने का प्रयास करें। सच्चे धन की प्राप्ति मनुष्य को केवल पुरुषार्थ और पूर्ण परिश्रम से ही संभव हैं।
विद्वानों के मतानुसार की बिना परिश्रम से प्राप्त धन स्थिर नहीं रहता। धन की प्राप्ति किसी चमत्कार से नहीं होती, धन की प्राप्ति केवल परिश्रम से होती हैं। शास्त्रोक्त वर्णित उपायों से मनुष द्वारा किये गये परिश्रम के फल में वृद्धि संभव हैं। इन उपायों का मुख्य उद्देश्य मनुष्य को होने वाले लाभ की प्राप्ति में आने वाले विघ्न-बाधा एवं रुकावटों को दूर करना एवं लाभ के फल में वृद्धि करना हैं।
धन लक्ष्मी साधना
साधना हेतु सामग्री:-
माला: कमलगट्टे की या स्फटिक की
दिशा: उत्तर | आसन: पीला | वस्त्र: पीला
प्रसाद: दूध से बने प्रसाद का भोग लगाये
मंत्र:
ॐ श्रीं श्रीं क्लीं श्रीं लक्ष्मी आगच्छ आगच्छ मममंदे तिष्ठ तिष्ठ स्वाहा ||
Om Shreem Shreem Kleem Shreem Lakshmi Aagachchha Aagachchha Mamamande Tishtha Tishtha Swaha

विधि:
·       यह साधना किसी भी शुक्रवार को शुरू कि जा सकती हैं, उक्त मंत्र का 11 माला जप 43 दिन तक करने से मंत्र सिद्ध होता है, लेकिन यदि अक्षय तृतीया, धन तेरस और दीपावली आदी शुभ मुहूर्त होत तो इसे 21 दिन करके सिद्ध कर सकते हैं। 
·       साधना हेतु संध्या 7 बजे से रात 10 बजे तक का समय श्रेष्ठ होता हैं। यदि समय के अनुकूलता नहो तो अपनी सुविधानुसार समय चून सकते हैं।
·       पूजन के समय शुद्ध घी का दिपक जलाये जो साधना पूर्ण होने तक जलता रहे और सुगंधित अगरवती जलाये रखे। 
·       देवी लक्ष्मी जी को भोग में खीर या घर में बनी मिठाई का भोग लगाये।
·       श्री गणेश जी और अपने गुरुदेव का स्मरण कर साधना में सफलता की कामना करते हुवे साधना करें।
·       साधना की समाप्ति वाले दिन मंत्र का 11 माला अर्थात(1188) बार हवन करें, हवन में घी की आहुती दे। यदि किसी कारण से आहुति देने में असमर्थ हो तो आहुति की संख्या से दोगुना मंत्रजाप सम्प्पन कर सकते हैं।  
·       इस लक्ष्मी साधना के प्रभाव से व्यक्ति के पास किसी ना किसी माध्यम से धन आने लगता हैं। यह संभव नहीं की इस साधना के बाद भी व्यक्ति निर्धन रहें। 
आर्थिक लाभ एवं कार्यसिद्धि हेतु लक्ष्मी मंत्र साधना 
साधना हेतु सामग्री:
माला: स्फटिक की
दिशा: उत्तर या पूर्व
आसन: पीला
वस्त्र: सफ़ेद
प्रसाद: फल

मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं हं सौ जगत्प्रसूत्यै नमः।
Om Aim Hreem Shreem Kleem Ham Sou Jagatprasootyai Namah

विधि:
·       प्रातःकाल स्नानइत्यादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर पीले आसन पर बैठ जाये। लक्ष्मीजी के चित्र या मूर्ति को एक लकड़ी के चौकी पर रखदे।
·       लक्ष्मीजी को धूप-दीप इत्यादि से विधिवत पूजन करें, साधन काल में धूप-दीप चालु रखें। पीले या स्वेत फूल लक्ष्मीजी को अर्पित करें। यदि संभव हो तो एक फल भी लक्ष्मीजी को अर्पित करें।
·       फिर उपरोक्त मंत्र की 10 या 20 माला जाप करें। मंत्र की सिद्धि हेतु कुल 25000 जाप करें।
·       मंत्र जाप पूर्ण होने के पश्चयात प्रतिदिन 1 माला जप जरे। इस साधना को करने से साधक को धनलाभ होता हैं और इच्छित कार्य में सफलता प्राप्त होति हैं ( यदि अनुकूलता होतो प्रतिदिन 1000, 3000 या 5000 जाप भी कर सकते हैं।
·       जाप जितना अधिक होगा उतना अधिक लाभ मिलेगा। मंत्र सिद्धि 25000 जाप पूर्ण होने के पश्चयात प्रतिदिन नियम से एक निश्चित मात्रा में ही जाप करें, जप संख्या को कम या अधिक करने पर प्रतिकूल परिणाम संभव हैं।
·       ग्रहण काल, दीपावली, होली, अक्ष्यतृतिया आदि अबूझ मुहूर्त मुहूर्त पर अधिक फल प्राप्ति हेतु एवं मंत्र के प्रभाव को बढ़ाने हेतु अधिक मात्रा में जप किया जा सकता हैं, क्योकि, प्रतिदिन किये जारहे मंत्र जप कि अपेक्षा इन अवसरों पर प्रतिकूल परिणामों की संभावना नहीं होती इस लिये इन अवसरों पर जप अधिक संख्या में किये जा सकते हैं।
अनुभूत महालक्ष्मी मंत्र साधना
साधना हेतु सामग्री:
माला: कमल गट्टेकी या स्फटिक की
दिशा: उत्तर या पूर्व
आसन: पीला
वस्त्र: सफ़ेद
प्रसाद: फल या मिश्री
मंत्र: 
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।
Om Shreem Hreem ShreeM Kamale Kamalalaye Praseeda Praseeda Shreem  Hreem Om Mahalakshmyai Namah
विधि:
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से (या ग्रहण काल, दीपावली, होली, अक्ष्यतृतिया आदि किसी शुभ मुहूर्त) से मंत्र जाप शुरु करें। और एक मास में सवा लाख मंत्र जाप पूर्ण करें। फिर उपरोक्त मंत्र की प्रतिदिन 1 माला जप करें। इस साधना से अत्याधिक धन लाभ होने के योग बनने लगते हैं। लक्ष्मीजी को धूप-दीप इत्यादि से विधिवत पूजन करें, साधन के समय में धूप-दीप चालु रखें। सुगंधित फूल लक्ष्मीजी को अर्पित करें। यदि संभव हो तो एक फल या मिश्री भी लक्ष्मीजी को अर्पित करें। मंत्र जाप पूर्ण होने से पहले ही साधक को आर्थिक लाभ मिलना शुरु हो जाता हैं, इस में जरा भी संदेह नहीं हैं।
शीघ्र फलदायी लक्ष्मी मंत्र साधना
साधना हेतु सामग्री:
माला: स्फटिक की
दिशा: उत्तर या पूर्व
आसन: पीला
वस्त्र: सफ़ेद
मंत्र:
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मी महालक्ष्मीं सर्व काम प्रदे सर्व सौभाग्यदायिनी अभिमंत्र
प्रयच्छ सर्व सर्वगते सुरुपे सर्वदुर्जय विमोचिनी ह्रीं सः स्वाहा।
Om Hreem Shreem Lakshmi Mahalakshmim Sarv Kam Prade Sarv Soubhagyadaayinee
Abhimantra Prayachchha Sarv Sarvagate Surupe Sarvdurjaya Vimochini Hreem Sah Swaha

विधि:
प्रतिदिन नियमित समय पर मंत्र जप करें। लकड़ी की चौकी पर लक्ष्मीजी का चित्र स्थापित कर उसका धूप-दीप इत्यादि से विधिवत पूजन करें, साधन के समय में धूप-दीप चालु रखें। सुगंधित फूल लक्ष्मीजी को अर्पित करें। 20 दिन में एक लाख जाप पूर्ण करें। जाप पूर्ण होने के पश्चयात प्रतिदिन 1 माला जाप करें। इस साधना से साधन की आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगता हैं, और उसे माँ लक्ष्मी की कृपा से सुख-संपत्ति और वैभव की प्राप्ति होती हैं।

चिंता मणि लक्ष्मी साधना
साधना हेतु सामग्री:
माला: स्फटिक की
दिशा: पश्चिम
आसन: पीला
वस्त्र: सफ़ेद
प्रसाद: दूध से बने प्रसाद का भोग लगाये
मंत्र:
ॐ ह्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं लक्ष्मी मम ग्रहम् धनपूर चिंता दूर दूर सवाहा !
Om Hreem Shreem Shreem, Shreem, Shreem Shreem Shreem Shreem
Lakshmi Mam Graham Dhanpur Chinta Door Door Swaha
विधि:
·       श्री गणेश जी और अपने गुरुदेव का स्मरण कर साधना में सफलता की कामना करते हुवे साधना करें। ग्रहण काल, दीपावली, होली, अक्ष्यतृतिया आदि अबूझ मुहूर्त में देवी लक्ष्मी का धूप-दिप आदि से पूजन कर इस मंत्र को 108 बार जप करके सिद्ध कर ले।
·       फिर जब कोई महत्वपूर्ण व्यवसायीक कार्य करना हो तो तब उक्त मंत्र का पुनः 108 बार जप करके कार्य स्थल पर जाने से व्यापार आदि महत्वपूर्ण कार्यों में बढो़तरी एवं अत्याधिक लाभ की प्राप्ति होती हैं।
·       लक्ष्मी प्राप्ति के एकाधिक स्तोत्र बनने लगेंगे और यदि कोई बेरोजगार हो व्यक्ति को आमदनी का कोई साधन नजर नहीं आ रहा हो तो भी इस मंत्र को सिद्ध कर सकता हैं और सिद्ध करने के पश्चयात 11 दिन 108 बार जप करने से व्यक्ति को उत्तम रोजगार की प्राप्ति के योग बनने लगते है।
·       यदि परिवार में कोई न कोई कमी रहती हैं या घर की प्रगति या उन्नति के मार्ग प्रसस्त नहीं हो पारहे हो या अत्याधिक कर्ज सर पर चढ़ गया हो तो भी इस मंत्र को सिद्ध कर सकते हैं।
·       यदि अबूझ मुहूर्त के आने से पहले इस मंत्र को सिद्ध करने की आवश्यक्ता या इच्छा हो तो इस मंत्र का जाप 11 दिन तक 108 वार हर रोज जपने से भी मंत्र सिद्ध होता है।

ऋद्धि-सिद्धि प्रद पद्मावती साधना

साधना हेतु सामग्री: केसर,
यंत्र: मंत्रसिद्ध प्राणप्रतिष्ठित श्री यंत्र
माला: कमल गट्टेकी या स्फटिक की
दिशा: उत्तर
आसन: सफ़ेद 
वस्त्र: सफ़ेद 

मंत्र:
ॐ पद्मावती पद्मनेत्रे लक्ष्मीदायिनी सर्व कार्य सिद्धि
करि करि ॐ ह्रीं श्रीं पद्मावत्यै नमः।
Om Padmavati Padmanetre Lakshmidayinee Sarv Karya Siddhi
Kari Kari Om Hreem Shreem Padmavatyai Namah

विधि:
किसी भी बुधवार से मंत्र जाप प्रारंभ करें। लकड़ी की चौकी पर सफेद वस्त बिछा कर उस पर मंत्रसिद्ध प्राणप्रतिष्ठित श्री यंत्र को स्थापित करें। यंत्र को शुद्ध जल से स्नान कराके, उसपर केसर लगाये, उसका धूप-दीप इत्यादि से विधिवत पूजन करें, साधन के समय में धूप-दीप चालु रखें।
उक्त मंत्र का 5 या 11 दिनों में सवा लाख जप करने से मंत्र सिद्ध हो जाता हैं। मंत्र जाप पूर्ण होने पर कुंवारी कन्याओं को भोजन कराये, यथा शक्ति सामर्थ्य के अनुसार भेट में वस्त्र इत्यादि दें। फिर उस यंत्र को अगले दिन अपने व्यवसायेक प्रतिष्ठान या तिजोरी, कैश बोक्स या पूजा स्थान में स्थापित करदे इससे व्यवसाये मेम विद्धि होती हैं, समाज में चारों और साधन का यध कीर्ति चरों और फैलने लगती हैं। साधन दिन प्रति-दिन समृद्ध होता जाता हैं। जब तक यंत्र साधन के पास रहेगा तब-तब उसे जीवन में किसी चिज की कमी नहीं होगी।

लक्ष्मी प्राप्ति हेतु घंटाकर्ण महाविर साधना
साधना हेतु सामग्री: केसर, चंदन, वासकेप, गुलाब फूल
यंत्र: श्री घंटाकर्ण महाविर यंत्र अथवा घंटाकर्ण महाविर पताका यंत्र(यदि यंत्र की सामर्थ्यता न हो तो घंटाकर्ण महाविर जी का चित्र स्थापित करलें।)
माला: मूंगे की
दिशा: उत्तर
आसन: पीला
वस्त्र: लाल पीतांबर
मंत्र:
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ठं ॐ घण्टाकर्ण महावीर लक्ष्मी
पूरय पूरय सुख सौभाग्य कुरु कुरु स्वाहा।
Om Hreem Shreem Kleem Thah Om Ghantakarna Mahaveer Lakshmi
Pooray Pooray Sukha Soubhagya Kuru Kuru Swaha

विधि:
यह साधना यदि दीपावली में धन त्रयोदशी से आरंभ की जाये तो श्रेष्ठ हैं यदि अन्य काल में शुरु करनी पडे़तो किसी भी गुरुवार से इसे आरंभ कर सकते हैं।
धन त्रयोदशी (धनतेरस) के दिन उक्त मंत्र की 40 माला, रुप चतुर्दशी (अर्थात नरकहरा चतुर्दशी, नरका चौदस, काली चतुर्दशी, काळीचौदस,) को 42, दीपावली के दिन 43, माला जाप करें। यदि अन्य दिन से आरंभ कर रहे हो तो गुरुवार को 40, शुक्र वार को 42 और शनिवार को 43 माला मंत्र जप करें।
लकड़ी की चौकी पर सफेद वस्त बिछा कर उस पर मंत्रसिद्ध प्राणप्रतिष्ठित श्री घंटाकर्ण महाविर यंत्र या चित्र को स्थापित करें। शुद्ध चंदन और केसर का सुखा मिश्रण  (वासकेप) छिड़के, यदि यह द्रव्य अप्राप्त हो तो अष्टगंध छिड़के(नोट:द्रव्य केवल सुखा छिड़के श्री घंटाकर्ण महाविर के पूजन में जल मिश्रित घोल का प्रयोग न करें।), उसका धूप-दीप (शुद्ध चंदन धूप का प्रयोग श्रेष्ठ)इत्यादि से विधिवत पूजन करें, साधन के समय में धूप-दीप चालू रखें। सुगंधित देशी लाल गुलाब फूल के प्राप्त हो जाये तो लगाये अन्यथा पीला, सफेद, गुलाबी रंग का गुलाब भी लागा सकते हैं।
फिर श्री घंटाकर्ण महाविर के उपरोक्त मंत्र का पूर्ण श्रद्ध एवं निष्ठा से जाप करें। साधना पूर्ण होने पर श्री घंटाकर्ण महाविर प्रसन्न होते हैं शीध्र ही साधक को लक्ष्मी की प्राप्ति के योग बनने लगते हैं। साधना संपन्न होने पर प्रतिदिन उक्त मंत्र कि 1 माला जप करें।
विशेष नोट:  श्री घंटाकर्ण महाविर का पूजन करने वाले साधको हेतु मासं-मदिरा, कुसंग इत्यादि निषेध हैं। अतः मांस-मछली, शराब इत्यादि का सेवन करने वाले व्यक्ति कृप्या यह प्रयोग न करें। अन्यथा श्री घंटाकर्ण महाविर के प्रकोप से साधना का प्रतिकूल परिणाम संभव हैं। श्री घंटाकर्ण महाविर इस कलियुग में शीघ्र प्रसन्न होने वाले साक्षात देव हैं, इस मे जराभी संदेह नहीं हैं। इस साधना के पश्चयात मासं-मदिरा, परस्त्री-पुरुष इत्यादिका सेवन करने पर साधन द्वारा सिद्ध किया गया मंत्र प्रभाव हीन हो जाता हैं।
 GURUTVA JYOTISH E-MAGAZINE NOVEMBER-2018
(File Size : 7.07 MB)
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Article courtesy: GURUTVA JYOTISH Monthly E-Magazine November-2018
लेख सौजन्यगुरुत्व ज्योतिष मासिक ई-पत्रिका (नवम्बर-2018) 

स्थिर लक्ष्मी के लिए करें इन सात दुर्लभ सामग्रीयों के उपाय

स्थिर लक्ष्मी के लिए करें इन सात दुर्लभ सामग्रीयों के उपाय
Article courtesy: GURUTVA JYOTISH Monthly E-Magazine November-2018
लेख सौजन्यगुरुत्व ज्योतिष मासिक ई-पत्रिका (नवम्बर-2018) 
रक्त गुंजा
गुंजा एक दुर्लभ वनस्पति का बीज हैं। तंत्र शास्त्र में यह एक दुर्लभ एवं अत्यन्त प्रभावशाली वस्तु मानी जाती है। गुंजा प्रायः सफदे, लाल कालें रगं के बीज स्वरुप में पायी जाती हैं। विभिन्न तंत्र क्रियाओं में गुंजा बीज के साथ-साथ गुंजा के जड़ का भी विशेष रुप से प्रयोग किया जाता हैं।
गुंजा बीजों का प्रयोग विभिन्न कार्य उद्देश्य की पूर्ति हेतु किया जाता हैं। लाल गुंजा का प्रयोग विशेष रुप से लक्ष्मी प्राप्ति के लिये किया जाता हैं। लाल गुंजा पर एक काले रंग का छोटा बिंदू होता हैं। एसा माना जाता हैं की रक्त गुंजा से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि तो होती ही हैं साथ ही साथ में मां महालक्ष्मी की कृपा भी घर पर बनी रहती हैं।
v    दीपावली के दिन रक्त गुंजा के इक्कीस या ग्यारह दानों को गंगा जल से पवित्र करके पूजा स्थान रखदेना चाहिए। पूजा के पश्चयात गुंजा के दानों को अपनी तिजोरी, कैशबोक्स, गल्ले में लाल कपड़े में बांधकर से दिनों दिन परिवार की आर्थिक समृद्धि बढ़ती हैं।
v    मंत्र द्वारा सिद्ध रक्त गुंजा के इक्कीस या ग्यारह दानों को अपने व्यवसाय या ओफिस में रोकड़ रखने के साथ में रखने से धन की कभी कमी नहीं होती और कैश बोक्स कभी खाली नहीं रहता, लक्ष्मी जी का आशिर्वाद बना रहता हैं।
v    यदि मंत्र सिद्ध कि हुई रक्त गुंजा की माला को कोई व्यक्ति गले में धारण कर्ता हैं तो वह सर्वजन वशीकर के समान प्रभावशाली होती हैं। रक्त गुंजा की माला को केवल प्रयोग के समय या किसी महत्व पूर्ण कार्य या व्यक्ति से मिलते समय ही धारण करें, अनावश्य होने पर उसे उतार कर अपने पूजा सथान में रखदें।
v    किसी महत्वपूर्ण कार्य उद्देश्य की पूर्ति हेतु मंत्र सिद्ध रक्त गुंजा के इक्कीस दानों को अपने साथ लेकर घर से बाहर निकले, कार्य उद्देश्य पूर्ण होने पर उसे बहते जल में प्रवाहित कर दें।

नाग केशर
नाग केसर अति पवित्र एवं उर्लभ वनस्पतियों में से एक मानी जाती हैं। इसे नागकेश्वर के नाम से भी जाना जाता हैं। धार्मिक मान्यताओं में नाग केशर का स्थान प्रमुख वस्तुओं अग्रस्त हैं। तंत्र गंथों में नाग केशर के विभिन्न प्रयोगों का वर्णन मिलता हैं। धनप्राप्ति एवं सुख-समृद्धि हेतु भी नाग केशर का उपयोग किया जाता हैं।
v    चांदी (यदि उपल्बध नहों को अन्य धातु ) की एक छोटी सी डिब्बी में नागकेशर को शहद के साथ मिलाकर ढ़क्कन लगाकर उसे बंद करदें। दीपावली की रात्रि में उसे पूजन के बाद में तिजोरी में रखदे। अगली दीवाली को उस डिब्बी को खोल कर नागकेशर और शहद को बदल दें। एकबार डिब्बी रखदेने के बाद उसे खोले नहीं उसे बंध ही रहने दे।
v    धन-समृद्धि की प्राप्ति हेतु एक नविन पीले वस्त्र में नागकेशर, साबुत हल्दी, सुपारी, एक तांबे का सिक्का, एक पांच या दस का सिक्का, अक्षत को एक साथ कर के उसको कपडे़ में बांध दें। फिस उसे धूप-दीप से पूजन करके अपनी तिजोरी में रखकर प्रतिदिन पूजन के समय उसे धूप दें तो धनलाभ होने लगेगा।
v    दीपावली की रात या अन्य किसी शुभ मुहूर्त में नागकेशर और पांच सिक्कों को लेकर उसे पूजा स्थान पर रखदे फिर पूजन की समाप्ति के बाद उसे एक पीले कपडे़ में बांध कर अपने व्यवसायीक प्रतिष्ठान के गल्ले, तिजोरी आदि धन रखने वाले स्थान पर रख दें। इस प्रयोग से व्यक्ति को कभी धन की कमी नहीं रहेगी।
v    धन प्राप्ति के लिए के लिए सोमवार युक्त पूर्णिमा के दिन शिवमंदिर में शिवलिंग का कच्चे, दूघ, दही, शहद चीनी और घी अर्थात पंचामृत से अभिषेक करें। फिर शिवलिग का गंगाजल से अभिषेक करें। तत्पश्चयात पांच बिल्वपत्रों के साथ में पांच नागकेशर को शिवलिंग पर अर्पित करें। यह क्रिया प्रतिदिन अलगी पूर्णिमा तक नियमित रुप से करें। अंतिक दिन चढा़ए गये नागकेशर एवं बिल्वपत्रों में से एक बिल्वपत्र एवं थोडा़ नागकेशर घर वापस ले आये उसे अपनी तिजोरी में रखदें। इस प्रयोग से अत्याधिक धनलाभ की प्राप्ति होती हैं।

गोमति चक्र
गोमति चक्र समुद्र से प्राप्त होने वाली दुर्लभ वस्तुओं में से एक हैं। क्योकि यह आसानी से प्राप्त नहीं होता यह एक सफेद रंगका गोलाकार दिखने में सीप से मिलता-जुलता प्रतित होता हैं। हालांकी कई गोमति चक्र पूर्णतः सफेद नहीं होती उसके उपर गेहुवें और काले रंग की पलती धारीया होती हैं, जब यह धारीया घीस या उसे पोलिस किया जाता हैं तब यह सफेद रंग का नजर आने लगता हैं। इस के उपर चक्र जैसे आकृतिया कृदरति और पर पाई जाती हैं इस लिए इसे गोमति चक्र कहते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र से प्राप्त होने वाले सभी वस्तुये प्रायः लक्ष्मी प्राप्ति हेतु पूजन में प्रयुक्त होती हैं। गोमति चक्र भी समुद्र से प्राप्त होता हैं और लक्ष्मी की प्रिय वस्तु होने से लक्ष्मी पूजन में इसका विशेष महत्व हैं। 
पुरातन काल से ही गोमति चक्र को लक्ष्मी प्राप्ति के अलागा अन्य तंत्र प्रयोगो एवं कामना पूर्ति हेतु भी इसका विशेष रुप से प्रयोग किया जाता हैं। क्योकि विद्वानों के मतानुसार सिद्ध गोमति चक्र से विभिन्न मनोकामनाएं सरलता से पूर्ण की जासकती हैं।
v    दीपावली की रात को पांच मंत्र सिद्ध गोमति चक्र को स्थापित करके उसका साक्षात लक्ष्मी रुप में पूजन करने से उसका विधिवत पूजन करने से व्यक्ति को जीवन में निरंतर धन की प्राप्ति होती रहती हैं।
v    दीपावली के दिन 11 गोमती चक्र और 11 पीली कोडियों दोनों को को एक पीले कपडे पर रख रखकर कर पूजन करें। फिर "ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं" मंत्र का पांच माला करके उसे कपडे़ में बांधकर अपने तिजोरी में स्थापित करने से धन लाभ की प्राप्ति होती हैं। 

पीली कौड़ियां
पौराणिक काल से ही कौड़ियों को सौभाग्य कारक मानी जाती हैं। देश एवं विदेश की विभिन्न सभ्यताओं एवं प्रांतो में कौड़ियों के विभिन्न छोट-बडे प्रयोग होते आये हैं। पूरातन काल में जन सिक्को का चलन नहीं था तब लोग कौड़ियों का नगद्दी के रुप में प्रयोग करते थे। लोग कौड़ियों का आदान-प्रदान करके चिज-चस्तु खरिदते और बेचते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र से प्राप्त होने वाले सभी वस्तुये प्रायः लक्ष्मी प्राप्ति हेतु पूजन में प्रयुक्त होती हैं। कौड़ियां भी समुद्र से प्राप्त होता हैं और पीली कौड़ियां लक्ष्मी की अति प्रिय वस्तु होने से लक्ष्मी पूजन में इसका विशेष महत्व हैं। 
v    दीपावली की रात में 11 पीली कौड़ियों पूजा स्थान में रखदें पूजन की समाप्ति पर उसे अपने तिजोरी में गहने इत्यादि के साथ में रखदें तो परिवार में गहने-जेवरात की वृद्धि होने लगती हैं। अगले वर्ष पुनः दीपावली पूजन के समय कौड़ियों को बदलदे। 
v    दीपावली की रात में 11 पीली कौड़ियों को अपने घर या व्यवसायीक स्थान में तिजोरी में रखने से व्यापार और धन की में वृद्धि होती हैं।
हकीक
हकीक एक प्रकार का उपरत्न हैं, जिसका उपयोग विभिन्न तंत्र प्रयोग एवं धनप्राप्ति हेतु विशेष रुप से किया जाता हैं। यह एक अत्यंत प्रभावशाली पत्थर माना जाता हैं।
हकीक के प्रभावों के विषय कुछ जानकार विद्वानो का अनुभव हैं की हकीक को यदि कोई व्यक्ति धारण नहीं करके केवल अपने साथ रखता हैं तो भी वह अपना चमत्कारी प्रभाव दिखा ही देता हैं।
v    दीपावली के दिन पूजान के समय 21 हकीक को स्थापीत करदे पूजन के पश्चयात उसे दीपावली के दिन ही जमीन में गाढ़देने से व्यक्ति को निरंतर धन लाभ होता रहता हैं।
v    मनोकामना पूर्ति हेतु ग्यारह हकीक पत्थर को अपने पूजा स्थान पर रख कर अलगले दिन उसे मंदिर में चढाने से मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती हैं।
v    दीपावली के दिन हकीक माला से लक्ष्मी मंत्र का एक माला जप करके। माला को धारण करने से देवी लक्ष्मी की हमेंशा कृपाद्रष्टि बनी रहती हैं। मंत्र: " ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं लक्ष्मी वासुदेवाय नमः।"
v    लक्ष्मी जी के चित्र को 27 हकीक पत्थर के उपर स्थापित करने से व्यक्ति को निश्चित रुप से आर्थिक लाभ प्राप्त होता हैं। 
 लघु श्रीफल
लघु श्रीफल एक प्रकार का छोटे स्वरुप का नारियल होता हैं। जिसके ऊपर नारियल के समान ही जटाएं होती हैं जो करीब एक ईच जितना बडा़ होता हैं। लघु श्रीफल को नारियल का लघुरुप माना जाता हैं। लघु श्रीफल का प्रयोग विशेष रुप से लक्ष्मी प्राप्ति हेतु किया जाता हैं।
क्योकि लघु श्रीफल मां महालक्ष्मी का यह प्रिय फल मानाजाता हैं और एसी मान्यता हैं की जिसके पास लघु श्रीफल होता हैं देवी लक्ष्मी निश्चित रुप से उस पर कृपा करती हैं। लघु श्रीफल के पूजन से मां लक्ष्मी खिंची चली आती हैं।
v    जिस भी घर में लघु श्रीफल होता हैं वहां सुख-संपन्नता और वैभव का वास होता हैं।
v    यदि लघु श्रीफल को व्यवसायीक स्थान पर रखने से व्यापार में दिन प्रति दिन उन्नति होती रहती हैं।
v    विद्वानो का कथन हैं की यदि किसी व्यक्ति को सौभाग्य से 11 लघु श्रीफल प्राप्त हो जाये तो उसके जन्मों-जन्म की दरिद्रता का अंत हो जाता हैं और यदि किसी व्यक्ति के घर में 1 लघु श्रीफल का पूजन होता हों वहां से दुखः, दरिद्रता कोसो दूर रहती हैं।
 काली हल्दी
जिस प्रकार से हल्दी पीले रंगी को होती हैं। उसी प्रकार एक दुर्लभ जाती की काले रंगकी हल्दी भी पाई जाती हैं। काली हल्दी को कृष्ण हरिद्रा के नाम से जाना जाता हैं। काली हल्दी की सुगंध कपूर से मिलती-जुलती होती हैं। काली हल्दी को मुख्यतः तंत्र क्रियाओं एवं लक्ष्मी प्राप्ति हेतु एक दुर्लभ औषधि मानते हैं।
v    जिस भवन में मंत्र सिद्ध काली हल्दी का पूजन करने से भवन में धन-सौभाग्य की स्वतः वृद्धि होने लगती हैं।
दीपावली के दिन या अन्य किसी शुभ मुहूर्त में काली हल्दी को धूप-दीप आदि से पूजन कर के अपनी तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर रखने से धन का कभी अभाव नहीं रहता हैं।
 GURUTVA JYOTISH E-MAGAZINE NOVEMBER-2018
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Article courtesy: GURUTVA JYOTISH Monthly E-Magazine November-2018
लेख सौजन्यगुरुत्व ज्योतिष मासिक ई-पत्रिका (नवम्बर-2018)